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Benefits of Vastu Shastra

Many factors govern the life of a human being; his fate, karma and vastu of the place where he lives and work.Apart from karma of a person, fate and vastu affects life’s quality.If the vastu is poor but the fate of a person is good then results obtained can range from poor to mediocre; where as if the vastu is good and fate is unfavorable then the ill effects are minuscule.It is important to follow vastu shastra guidelines while constructing a house, shop or any other structure as it changes a man’s destiny for betterment.The application of vastu shastra are tremendous, read our article to know how you can follow vastu shastra in your home for a better, happy, successful and prosperous life.

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01 जून 2020, ज्येष्ठ शुक्ल 10 गंगा दशहरा

गंगा नदी को देश की सबसे पवित्र नदी में गिना जाता है. कहते है इसमें नहाने से मानव जाति के सारे पाप धुल जाते है. कल-कल कर बहती गंगा का जिस दिन धरती में अवतरण हुआ था, यानि जिस दिन वो धरती में पहुंची थी, उसे आज हम गंगा दशहरा के रूप में मनाते है. हिन्दू कैलेंडर के अनुसार ये ज्येष्ठ माह में ज्यादातर आती है. इस दिन देश विदेश से लोग गंगा तट के किनारे स्नान व उसकी पूजा अर्चना के लिए पहुँचते है. गंगा दशहरा में दान व स्नान का बहुत महत्त्व है. कहते है अगर आपके आसपास गंगा जी नहीं है, तो आप कोई भी पवित्र नदी में जाकर स्नान करें और गंगा जी के जाप का उच्चारण करें. इसके बाद गरीब जरुरत मंद को दान दक्षिणा दें. गंगा दशहरा का महोत्सव पुरे दस दिन तक मनाया जाता है.

गंगा दशहरा स्‍नान का शुभ मुहूर्त :
इस शुभ मुहूर्त में पूजा, दान और स्नान करें.
गंगा दशहरा पर सुबह 5:41 से दोपहर 02:58 तक दशमी तिथि होगी इस दौरान पूजा और दान दोनों ही बेहद शुभ रहेगा।
स्नान के लिए प्रात: 4.15 से सुबह 5.35 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त है जिसमें स्नान करना ज्यादा शुभ होगा। इस दौरान गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। इसे ऋषि स्नान भी कहते हैं। जबकि सुबह से सूर्य अस्त तक भी श्रद्धालु स्नान कर पुण्य लाभ कमा सकते हैं।
इस तरह करें पूजन :
अगर घर के करीब गंगा नहीं हैं तो किसी भी नदी या तालाब में स्नान करें या घर में ही स्नान कर गंगा जी का ध्यान करें।

स्नान करते वक्त नदी में 10 बार गोते लगाएं।

5 पुष्पांजलि अर्पित करें और भगीरथ का नाम जपते हुए मंत्र उच्चारण करके पूजन करें।

गंगा दशहरा 10 पापों का नाश करने वाला होता है इसलिए पूजा में 10 प्रकार के फूल, दशांग धूप, 10 दीपक, 10 प्रकार के नैवेद्य, 10 तांबूल एवं 10 फल का प्रयोग करें।

10 ब्राह्मणों को 16 मुट्ठी जौ और तिल दक्षिणा में दें। सत्तू का भी दान करें।

इसका करें जप :
गंगा दशहरा पर स्नान के दौरान ‘ऊँ नम: शिवाय नारायण्यै दशहराय मंत्र का जप करना चाहिए। इसके बाद ‘ऊँ नमो भगवते एं ह्रीं श्रीं हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय स्वाहा’ मंत्र का भी जप करें।
दस पापों का करता है नाश :
गंगा दशहरा, दस शुभ वैदिक गणनाओं के लिए मनाया जाता है जो विचारों, भाषण और कार्यों से जुड़े दस पापों को धोने की गंगा की क्षमता को दर्शाता है। दस वैदिक गणनाओं में ज्येष्ठ माह, शुक्ल पक्ष, दसवां दिन, गुरुवार, हस्त नक्षत्र, सिद्ध योग, गर-आनंद यौग और कन्या राशि में चंद्रमा और वृष राशि में सूर्य शामिल हैं। मान्यता ऐसी है कि इस दिन मां गंगा की पूजा करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कैसे आईं धरती पर गंगा?
माना जाता है भागीरथ अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए धरती पर गंगा को लाना चाहते थे। क्योंकि एक श्राप के कारण केवल मां गंगा ही उनका उद्धार पर सकती थीं। जिसके लिए उन्होंने मां गंगा की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ने दर्शन दिए और भागीरथ ने उनसे धरती पर आने की प्रार्थना की। फिर गंगा ने कहा कि मैं धरती पर आने के लिए तैयार हूं , लेकिन मेरी तेज धारा से धरती पर प्रलय आ जाएगी। जिस पर भागीरथ ने उनसे इसका उपाय पूछा और मां गंगा ने भागीरथ को इसका उपाय बताया। माना जाता है मां गंगा के प्रचंड वेग को नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समा लिया जिससे धरती को प्रलय से बचाया जा सके और उसके बाद नियंत्रित वेग से गंगा को पृथ्वी पर प्रवाहित किया। जिसके बाद भागीरथ ने अपने पूर्वजों की अस्थियां प्रवाहित कर उन्हें मुक्ति दिलाई। तब से पतित पावनी मां गंगा धरती पर लोगों के पापों का नाश करके उन्हें मुक्ति दिला रही हैं।

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वास्तु उपाय

समृद्धि तो आपकी मेहनत पर निर्भर करती है, लेकिन सुख और शांति के लिए आप क्‍या कर सकते हैं। सुख और शांति के लिए जितना ज्‍यादा आपका व्‍यवहार मायने रखता है, उससे कहीं ज्‍यादा आपके घर का वास्‍तु। मकान को घर बनाने के लिए जरूरी है, परिवार में सुख-शांति का बना रहना। और ऐसा होने पर ही आपको सुकून मिलता है। यदि आप घर बनवाने जा रहे हैं, तो वास्‍तु के आधार पर ही नक्‍शे का चयन करें। अपने आर्किटेक्‍ट से साफ कह दें, कि आपको वास्‍तु के हिसाब से बना मकान ही चाहिए। हां यदि आप बना-बनाया मकान या फ्लैट खरीदने जा रहे हैं, या पूर्व में मकान बनाते समय वास्तु अनुरूप बनाने से चूक गए हो तो वास्‍तु संबंधित निम्‍न बातों का ध्‍यान रख कर आप अपने घर में सुख-शांति बनाये रखने में सफल हो सकते हैं घर के प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक या ऊँ की आकृति लगाएं। इससे परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। घर की पूर्वोत्‍तर दिशा में पानी का कलश रखें। इससे घर में समृद्धि आती है घर के खिड़की दरवाजे इस प्रकार होनी चाहिए, कि सूर्य का प्रकाश ज्‍यादा से ज्‍यादा समय के लिए घर के अंदर आए। इससे घर की बीमारियां दूर भागती हैं।     

परिवार में लड़ाई-झगड़ों से बचने के लिए ड्रॉइंग रूम यानी बैठक में फूलों का गुलदस्‍ता लगाएं।रसोई घर में पूजा की अल्‍मारी या मंदिर नहीं रखना चाहिए। बेडरूम में भगवान के कैलेंडर या तस्‍वीरें या फिर धार्मिक आस्‍था से जुड़ी वस्‍तुएं नहीं रखनी चाहिए। बेडरूम की दीवारों पर पोस्‍टर या तस्‍वीरें नहीं लगाएं तो अच्‍छा है। हां अगर आपका बहुत मन है, तो प्राकृतिक सौंदर्य दर्शाने वाली तस्‍वीर लगाएं। इससे मन को शांति मिलती है, पति-पत्‍नी में झगड़े नहीं होते।     

वास्तु विज्ञान के अनुसार आपका घर खास तौर पर आपका बेडरूम वास्तु दोष से मुक्त हो तो कई सारी परेशानी यूं ही खत्म हो जाती है। खास तौर पति-पत्नी के बीच प्यार की कमी और पैसों को लेकर परिवार में होने वाले छोटे मोटे विवादों का सामना नहीं करना पड़ता है। इसलिए अपनी लाइफ को रोमांटिक और खुशहाल बनाने के लिए बेडरूम में वास्तु की इन बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए। चाइनिज वास्तु विज्ञान के अनुसार बेडरूप में मेनडरिन बतख की मूर्ति या तस्वीर रखनी चाहिए। यह प्रेम और खुशी के प्रतीक पक्षी माने जाते हैं। यह पति-पत्नी के बीच प्रेम संबंध को मजबूत बनाता है। जिनकी शादी में बाधा आ रही हो वह भी अपने बेडरूम में इसे रखें तो लाभ मिलता है। ध्यान रखना चहिए कि यह पक्षी हमेशा जोड़े में होता है। अकेला रखने से नुकसान होता है।     

बेड के नीचे या जिस बेड पर आप सोते हैं उसके बक्से में कोई भी इलेक्ट्रॉनिक चीजें या कबाड़ नहीं रखना चाहिए। यह न सिर्फ आपके संबंधों को खराब करता है बल्कि आर्थिक समस्याओं को भी बढ़ता है। इससे पति-पत्नी के बीच धन संबंधी विषयों को लेकर मन मुटाव हो सकता है। वास्तु विज्ञान के अनुसार विवाहित लोगों को बेडरूम में बेड पर एक ही गद्दे और बेड का इस्तेमाल करना चाहिए। बेड, बेडशीट और गद्दा अलग-अलग होना भी संबंधों में दूरियां बढ़ाने वाला होता है। फेंगशुई में यह भी कहा गया है कि अगर संभव हो तब बेडरूम में दर्पण नहीं लगाना चाहिए। बेडरूम में दर्पण का रिफ्लैक्शन बेड पर होने से स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे पति अथवा पत्नी में से किसी एक की तबीयत अक्सर खराब रहती है। इससे संबंधों में भी दूरी बढ़ने लगती है और जीवन में प्यार की कमी होने लगती है। यदि आपके घर का बजट गड़बड़ा गया हो, आप से ज्यादा खर्च होता है, परिवार में अशांति रहती है, नोट कमाने के सारे प्रयास व्यर्थ साबित हो रहे हों, तो भगवान को खुश करने के लिए पूजा कक्ष में लाल रंग का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करें। घर में घुसते ही शौचालय नहीं होना चाहिए। घर के मुखिया का बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में अच्‍छा माना जाता है।     

घर में शौचालय के बगल में देवस्‍थान नहीं होना चाहिए। जहां आप बटुआ रखते हों, उस स्थान को भी लाल व पीले कलर से रंग दें। कुछ ही दिनों में फर्क महसूस होगा। यदि आपको लगता है कि आपसे कोई ईर्ष्या करता है, आपके कई दुश्मन हो गए हैं। हमेशा असुरक्षा व भय के माहौल में जी रहे हों, तो मकान की दक्षिण दिशा में से जल के स्थान को हटा दें। इसके साथ ही एक लाल रंग की मोमबत्ती आग्नेय कोण में तथा एक लाल व पीली मोमबत्ती दक्षिण दिशा में नित्यप्रति जलाना शुरू कर दें। घर में बेटी जवान है, उसकी शादी नहीं हो पा रही है, तो एक उपाय करें- कन्या के पलंग पर पीले रंग की चादर बिछाएं, उस पर कन्या को सोने के लिए कहें। इसके साथ ही बेडरूम की दीवारों पर हल्का रंग करें। ध्यान रहे कि कन्या का शयन कक्ष वायव्य कोण में स्थित होना चाहिए।      कभी-कभी ऐसा होता है कि व्यक्ति सर्वगुण सम्पन्न होते हुए भी बेरोजगार रह जाता है। वह नौकरी के लिए जितना अधिक प्रयास करता है, उसकी कोशिश विफल होती जाती है। इसके लिए व्यक्ति भाग्य को जिम्मेदार ठहराता है। लेकिन अपने भाग्य को कोसने के बजाय एक उपाय करें- नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाएं, तो जेब में लाल रूमाल या कोई लाल कपड़ा रखें। सम्भव हो, तो शर्ट भी लाल हनें। आप जितना अधिक लाल रंग का प्रयोग कर सकते हैं, करें। लेकिन यह याद रखें कि लाल रंग भड़कीला ना लगे सौम्य लगे। रात में सोते समय शयन कक्ष में पीले रंग का प्रयोग करें। याद रखें, लाल, पीला व सुनहरा रंग आपके भाग्य में वृद्धि लाता है। अतः हमेशा इन रंगों का व्यवहार ज्यादा से ज्यादा करें, सफलता मिलेगी। जीवन में पीले रंग को सफलता का सूचक कहा जाता है। पीला रंग भाग्य में वृद्धि लाता है। कन्या की शादी में पीले रंग का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग किया जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि कन्या ससुराल में सुखी रहेगी।

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क्या बुध दिलाएगा आपको करियर में सफ़लता?

बुध ग्रह को बुद्धि का देवता माना गया है। ज्योतिष गणना के अनुसार मिथुन व कन्या राशि  का  प्रतिनिधित्व (स्वामी) बुध ग्रह को प्राप्त है। कुंडली में इसकी स्थिति काफी अधिक महत्व रखती है। यदि बुध अच्छी स्थिति में हो तो व्यक्ति को बुद्धि संबंधी कार्यों में विशेष सफलताएँ प्राप्त होती हैं। जबकि ये अशुभ स्थिति में हो तो कई प्रकार की मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं अगर हम इंसान के करियर के बारे में बात करें तो इसे भी आकार देने में बुध काफी महत्वपूर्ण निभाता है।

बुध एक ऐसा ग्रह है, जो सूर्य के सानिध्य में ही रहता है। जब कोई ग्रह सूर्य के साथ विशेष अंशात्मक दूरी पर होता है तो उसे अस्त माना जाता है। यदि बुध 14 डिग्री या उससे कम में सूर्य के साथ हो, तो उसे अस्त माना जाता है। लेकिन सूर्य के साथ रहने पर बुध ग्रह को अस्त का दोष नहीं लगता और अस्त होने से परिणामों में भी बहुत अधिक अंतर नहीं देखा गया है। बुध ग्रह कालपुरुष की कुंडली में तृतीय और षष्ठ भाव का प्रतिनिधित्व करता है। 

प्रत्येक ग्रह जातक के ऊपर अपना विशेष प्रभाव देता है। इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएँगे कि बुध ग्रह की विभिन्न भावों में स्थिति होने पर आपका कार्यक्षेत्र और प्रोफेशन किस रूप में प्रभावित होगा।

प्रथम भाव में बुध ग्रह का फल
किसी जातक की जन्म कुण्डली के प्रथम भाव में बुध ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक गणितज्ञ एवं परदेश में निवास करने वाला व विदेश से संबंधित व्यापार करता है। ऐसे जातकों को विदेशों से जुड़े कामों में सफलता भी प्राप्त होती है। इसके साथ ही ऐसे लोगों की तर्क क्षमता भी अच्छी होती है। अगर आप भी अपने करियर के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो आप प्रोफेशनल्स के लिए हमारी कॉग्निएस्ट्रो रिपोर्ट की एक कॉपी प्राप्त कर सकते हैं।

द्वितीय भाव में बुध ग्रह का फल   
किसी जातक की जन्म कुण्डली के द्वितीय भाव में बुध ग्रह स्थित होता है तो ऐसा जातक लेखन तथा प्रकाशन कार्य से धनोपार्जन करने वाला, लेखन कार्य में दक्ष, अच्छा वकील, पिता का आज्ञाकारी, पाप भीरू, अत्यंत सुन्दर, कोमल देह वाला, सत्य वचन बोलने वाला, भ्रमण में रूचि रखने वाला, मिष्ठान सेवन में रूचि रखने वाला, अधिक खर्च करने वाला एवं परदेश में निवास करने वाला होता है।

तृतीय भाव में बुध ग्रह का फल 
किसी जातक की जन्म कुण्डली के तृतीय भाव में बुध ग्रह स्थित होता है तो ऐसा जातक व्यवसायी, जन्म स्थल से दूर रहकर धन अर्जित करने वाला, साहसी, सामुद्रिक शास्त्र का ज्ञाता, भरे पूरे परिवार से युक्त, सदगुणों से युक्त, कुशलता पूर्वक अपने अभीष्ट कार्य सिद्ध करने वाला होता है।

चतुर्थ भाव में बुध ग्रह का फल  
किसी जातक की जन्म कुण्डली के चतुर्थ भाव में बुध ग्रह स्थित होता है, तो ऐसा जातक ज्ञानी, तीव्र स्मरण, शक्तिवाला, नीतिज्ञ, भाग्यशाली, स्थूल देह वाला तथा चतुर बुद्धि व किसी राजनीतिज्ञ का गुप्तचर बन कर धन अर्जित करता है।

पंचम भाव में बुध ग्रह का फल  
किसी जातक की जन्म कुंडली के पंचम भाव में बुध ग्रह स्थित होता है, तो ऐसा जातक अपनी बुद्धि कौशल के बल पर अनेक बार लोगों को चमत्कृत कर के अपनी आजीविका चलाता है। ईश्वर की भक्ति में लीन, पवित्र हृदय वाला,  समाज व परिवार में प्रतिष्ठित, तीव्र बुद्धि से युक्त एवं यांत्रिक विषय सम्बंधित विशेष ज्ञान रख कर समाज को संबोधित करता है।इसके अलावा जो शादीशुदा जातक अपने बच्चों के भविष्य के बारे में जानना चाहते हैं या उनके लिए एक आदर्श कैरियर की तलाश में हैं

षष्टम भाव में बुध ग्रह का फल 
किसी जातक की जन्म कुंडली के षष्ठम भाव में बुध ग्रह स्थित होता है तो ऐसा जातक, लेखन एवं मुद्रण कार्य करता है और समाज सेवा में अपना पूर्ण योगदान देता है। खासकर ऐसा व्यक्ति जल से जुड़ा हुआ कार्य करता है।

सप्तम भाव में बुध ग्रह का फल  
किसी जातक की जन्म कुण्डली के सप्तम भाव में बुध ग्रह स्थित होता है, तो ऐसा जातक व्यवसाय कुशल व स्त्रियों के साथ मिल कर नये व्यापार की योजना बनाता है एवं सुखी जीवन व्यतीत करने वाला होता है।

अष्टम भाव में बुध ग्रह का फल 
किसी जातक की जन्म कुंडली के अष्टम भाव में बुध ग्रह स्थित होता है, तो ऐसा जातक  न्यायाधीश, वकील व अपने व्यवसाय के माध्यम से आजीविका चलाने वाले होता है एवं धार्मिक कार्य में रूचि रखता है।

नवम भाव में बुध ग्रह का फल 
किसी जातक की जन्म कुंडली के नवम भाव में बुध ग्रह स्थित होता है, तो ऐसा जातक व्यवसाय के माध्यम से आजीविका चलाने वाला, सत्पुरूषों की सेवा से लाभ अर्जित करने वाला,  ज्योतिष में रूचि रखने वाला, गायन एवं संगीत कला में रूचि रखने वाला एवं धार्मिक प्रवृत्ति का होता है।

दशम भाव में बुध ग्रह का फल  
किसी जातक की जन्म कुंडली के दशम भाव में बुध ग्रह स्थित होता है, तो ऐसा जातक अपने माता पिता एवं गुरुजनों का आज्ञाकारी, अनेक प्रकार के व्यवसायों से धन अर्जित करने वाला, वाहन व चौपायों से संबंधित व्यापार करता है।

एकादश भाव में बुध ग्रह का फल   
किसी जातक की जन्म कुंडली के एकादश भाव में बुध ग्रह स्थित होता है, तो ऐसा व्यक्ति यशस्वी, शास्त्रों का ज्ञाता, कुल का पोषण करने वाला, गायन कला में रूचि रखने वाला और इन्हीं क्षेत्रों से आजीविका चलाने वाला होता है।

द्वादश भाव में बुध ग्रह का फल  
किसी जातक की जन्म कुंडली के द्वादश भाव में बुध ग्रह स्थित होता है, तो ऐसा जातक दूसरे के धन का उपयोग करने वाला,  व्यसन से रहित, धार्मिक प्रवृत्ति वाला, शास्त्रों का ज्ञाता एवं परोपकारी प्रवृत्ति वाला होता है। दूसरों का सहयोग कर अपना जीवन यापन करता है।
इस प्रकार कुंडली के विभिन्न भागों में बुध ग्रह की स्थिति आप की जीवन शैली और कार्यकुशलता को प्रभावित करती है। उपरोक्त वर्णन में केवल सामान्य फल दिया गया है व्यक्तिगत विश्लेषण के लिए अपनी कुंडली का विश्लेषण तथा देश, काल, पात्र की स्थिति के आधार पर अध्ययन किया जाना आवश्यक होता है।

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अंगुलियों के पोरों पर बने चक्र से जानिए अपना भविष्य, ये बातें हैं काम की

हमारी अंगुलियों के पोरों में शंख या चंक्र रहते हैं। किसी के पोरों के 2 या 3 चक्र रहते हैं तो किसी के पोरों में रहते ही नहीं है। कहते हैं कि सभी अंगुलियों में चक्र होने का अर्थ है कि व्यक्ति चक्रवर्ती सम्राट की तरह जीवन व्यतीत करेगा। आओ जानते हैं इस संबंध में रोचक जानकारी।

अंगुलियों के पोरों के चक्र

  1. चक्र गोल पूर्ण घेरे से युक्त स्पष्ट अभंग होना चाहिए, नहीं तो टूटा हुआ चक्र व्यक्ति को अनेक मानसिक चिंताओं से ग्रस्त कर देता है।
  2. तर्जनी में चक्र होगा तो जातक अनेक मित्रों से युक्त होकर लोगों का नेतृत्व करेगा, महत्वाकांक्षी होने के साथ-साथ धन का भी लाभ होगा।

3. मध्यमा में चक्र होगा तो जातक धनवान और धार्मिक प्रवृत्ति का होगा और उस पर शनि की कृपा रहेगी। हो सकता है कि वह उत्तम ज्योतिषी, तांत्रिक या मठाधीश हो।

4. अनामिका अंगुली पर चक्र होना भाग्यशाली होने की निशानी है। ऐसे जातक उत्तम व्यापारी, धनवान, उद्योग-धंधों में सफल, प्रतिष्ठित लेखक, यशस्वी, ऐश्वर्यवान, राजनीतिज्ञ, कुशल प्रशासनिक अधिकारी भी हो सकते हैं।

5. सबसे छोटी अंगुली यानी कनिष्ठिका पर चक्र का होना सफल व्यापारी होने की निशानी होती है। ऐसे जातक सफल लेखक और प्रकाशक भी होते हैं व संपादन के क्षेत्र में भी सफलता पा सकते हैं।

6. यदि अंगूठे पोरे पर चक्र बना है तो जातक जीवन में कई उपलब्धियां प्राप्त करता है। वह जीवन में कई उल्लेखनीय कार्य भी करता है। ऐसा जातक भाग्यशाली व धनवान होता है। ऐसा जातक ऐश्वर्यवान, प्रभावशाली, दिमागी कार्य में निपुण, उत्तम गुणयुक्त, पिता का सहयोग व धन पाने वाला होता है।

7. अंगुलि में एक ही चक्र है तो ऐसे जातक को अवसरवादी माना जाता है। कहते हैं कि वह शातिर दिमाग का होता है।

8. अंगुलि में दो चक्र है तो ऐसा जातक समाज में सम्मान प्राप्त करता है। वह गुणवान माना जाता है और सभी तरह के भौतिक सुख प्राप्त करता है।

  1. अंगुलियों में 3 चक्र होने का अर्थ है कि जातक अपना ज्यादातर समय भोग विलास में ही व्यतीत करता है जिसके कारण पारिवार में
    कलह रहती है।

10• अंगुलियों में 4 चक्र है तो जातक के जीवन में निरन्तर संघर्ष बना रहता है। आर्थिक स्थिति कभी भी सुदृढ़ नहीं हो पाती है। हालांकि 50 वर्ष की आयु के बाद जीवन अच्‍छा होता है।

  1. यदि पांच चक्र है तो ऐसे जातक अपने ज्ञान और कार्यों से समाज का कल्याण करते हैं।
  2. यदि 6 चक्र है तो ऐसे जातक बौद्धिक एवं तार्किक होते हैं। उच्च पद पर रहकर सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करते हैं। इन्हें अपने दाम्पत्य जीवन पर ध्यान देना चाहिए।
  3. यदि 7 चक्र है तो ऐसे जातक पहाड़ की यात्रा करते हैं और उनमें साहस एवं पराक्रम की भावना होती है। रोमांच इन्हें पसंद होता है। यात्राओं से इन्हें धनलाभ भी होता है।
  4. यदि 8 चक्र है तो ऐसे जातक को अपनी मेहनत का फल नहीं मिलता है। बार बार असफलता का स्वाद चखना पड़ता है।
  5. यदि 9 चक्र है तो ऐसे जातक उच्च पद पर आसीन होकर सुखमय जीवन व्यतीत करते हैं। ये सामाजिक कार्य करने प्रशंसा प्राप्त करते हैं।
  6. यदि 10 चक्र है तो ऐसे जातक राजा के समान जीवन व्यतीत करते हैं। ये लोग राज्य के सलाहकर, मंत्री, सैन्य अधिकारी, राज्यपाल या मुख्यमन्त्री होते हैं। हालांकि यदि चक्र 10 नहीं है और फिर भी राजा की तरह जी रहा है तो उसकी कुंडली राजयोग या नीचभंग राजयोग होगा
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गर्भवती महिलाएं इन अशुभ संकेत को ना करें नजरअंदाज

हर माता पिता की इच्छा होती है कि उसकी होने वाली संतान गुणी, संस्कारी, बलवान, आरोग्यवान और दीर्घायु हो। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में जन्म से लेकर मृत्यु तक कई संस्कारों के बारे में बताया गया है। जिनमें से पहला संस्कार गर्भधान का माना जाता है। ज्योतिष में गर्भवस्था के दौरान कुछ उपाय बताए गए है जिसका ध्यान रखने पर पैदा होने वाली संतान गुणी और संस्कारी होती है।
गर्भवती महिला जरूर करें ये काम

  1. गर्भवती महिला के कमरे में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की फोटो या मूर्ति जरूर रखनी चाहिए। गर्भवस्था के दौरान कमरे में बाल गोपाल की फोटो बार-बार देखने से गर्भवती महिला का मन प्रसन्न रहता है और बच्चा भी सुंदर होता है।
  2. गर्भावस्था के दौरान बच्चे को नकारात्मक शक्तियों से बचाने के लिए कमरे में मोर पंख रखना शुभ माना जाता है।
  3. नकारात्मक शक्तियों से बचने के लिए गर्भवस्था के दौरान पूरे घर पर पीले चावलों से छिड़काव करना चाहिए। ज्योतिष में पीले चावल को मंगल का सूचक माना जाता है, ऐसे करने से बच्चे और मां पर नकारात्मक शक्तियों का असर नहीं होता है।
  4. गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के कमरे में सफेद और हल्के रंगों का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए। सफेद रंग को सुख-समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है। हल्के रंगों से गर्भवती महिला के मन और सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है जिससे सेहतमंद बच्चे का जन्म होता है।
  5. ऐसी मान्यता है कि गर्भावस्था के दौरान नकारात्मक शक्तियां सबसे ज्यादा मां और बच्चे की ओर आकर्षित होती है इसलिए तांबे या लोहे की चीजें पास में रखनी चाहिए।
    गर्भवती महिलाएं भूलकर भी न करे ये काम
  6. ज्योतिष के अनुसार गर्भावस्था के दौरान नौ महीने तक पति-पत्नी दोनों को ही दक्षिण दिशा की तरफ सिर करके सोना चाहिए। दक्षिण दिशा में पैर रख कर सोने से अशुभ होता है।
  7. गर्भवती महिला के कमरे में पितरों की फोटो नहीं होनी चाहिए।
  8. कमरे में कोई भी हिंसक तस्वीर भी नहीं होनी चाहिए। जैसे महाभारत या जंगली जानवर की फोटो।
  9. गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने बालों को खुला नहीं रखना चाहिए खास तौर पर सोते समय।
  10. गर्भावस्था के दौरान जिस कमरे में महिला सोती है उसके बेड़ के नीचे टूटी फटी और पुरानी चीजें जमा नहीं होनी चाहिए।
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ज्योतिष के अनुसार जानें कब खत्म होगा कोरोना का कहर, इस दिन से रुक जाएगे बढ़ते हुए केस…

हर तरफ कोरोना वायरस की चर्चा हो रही है, दुनिया के सभी देख कोरोना वायरस की वजह से परेशान है। ऐसे में अगर ज्योतिष की माने तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आख़िर कब ख़त्म होगा कोरोना का असर के माध्यम से आप दुनिया की स्थिति जान सकते है। आज हम आपको ज्योतिष के अनुसार भारत में और दुनिया में कोरोना वायरस कब तक खत्म हो जाएगा ये बताने वाले है।

कब खत्म होगा कोरोना का कहर

15 अप्रैल के बाद सूर्य मेष राशि में जाने वाला है। जानकारी के अनुसार मेष राशि में सूर्य उच्च का माना जाता है। सूर्य ग्रह उदय का प्रतीक है। इस वजह से 14 अप्रैल के बाद भारत में कोरोना वायरस खत्म हो जाएगा। इसी के साथ 15 अप्रैल के बाद भारत में इस वायरस के बढ़ते केस रुक जाएंगे।

दुनिया में कोरोना वायरस खत्म होने में आगे के 2 महीने और भी लग सकते है। अगर ज्योतिष की माने तो उनके अनुसार जून और जुलाई महीने के बीच में पूरी तरह से दुनिया इस वायरस से छुटकारा पा लेगी। इसी के साथ इस समय के दौरान इस वायरस की दवा मिलने की भी उम्मीद है। यह तो आने बाला समय ही बता पाएगा लेकिन इस दौरान कोई भी अपवाहों से बचें।